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फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर्स के लिए खुला नया रास्ता, वित्तीय सलाह क्षेत्र में बदलाव के संकेत
फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर्स के लिए खुला नया रास्ता, वित्तीय सलाह क्षेत्र में बदलाव के संकेत
मुंबई। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की एक महत्वपूर्ण घोषणा के साथ वित्तीय सेवा क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। मार्केट मास्ट्रू प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम करने की आधिकारिक अनुमति मिल गई है।
यह विकास सिर्फ एक कंपनी के लिए नहीं, बल्कि पूरे फाइनेंशियल एडवाइजरी इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय डिजिटल फाइनेंशियल एजुकेशन और पारंपरिक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम कर सकता है।
पारंपरिक और आधुनिक दृष्टिकोण का मेल
फाइनेंशियल सर्विसेज की दुनिया में यह एक अनूठा केस स्टडी बनकर उभरा है। मार्केट मास्ट्रू की यात्रा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंस से शुरू होकर औपचारिक रेगुलेटरी अप्रूवल तक पहुंची है। यह ट्रेंड अन्य फाइनेंशियल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी एक राह दिखाता है।
कंपनी का बैकग्राउंड पारंपरिक एडवाइजरी फर्म्स से काफी अलग है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फाइनेंशियल एजुकेशन देने वाले प्रोफेशनल्स का रेगुलेटेड फाइनेंशियल सर्विसेज में प्रवेश करना उद्योग के लिए एक नई शुरुआत है।
लीडरशिप टीम का अंतरराष्ट्रीय अनुभव
मार्केट मास्ट्रू की सफलता की कहानी में इसकी लीडरशिप टीम का महत्वपूर्ण योगदान है। कंपनी के डायरेक्टर अंकित यादव का बैकग्राउंड वेल्थ मैनेजमेंट में है, जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में व्यापक अनुभव हासिल किया है। उनका 15+ वर्षों का अंतरराष्ट्रीय अनुभव विशेष रूप से वैल्यू इन्वेस्टिंग और आईपीओ एनालिसिस में है।
साथ ही, सह-डायरेक्टर कृतिका यादव के पास सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी) की योग्यता है, जो अमेरिका से प्राप्त की गई है। भारत में सीएफपी प्रोफेशनल्स की संख्या काफी कम है - लगभग 2000 के आसपास। उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि में फाइनेंस में एमबीए भी शामिल है।
यह प्रोफेशनल संयोजन काफी दुर्लभ है क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय क्रेडेंशियल्स और भारतीय बाजार की समझ का मिश्रण देखने को मिलता है।
भारत में फाइनेंशियल गाइडेंस की गंभीर स्थिति
देश के फाइनेंशियल एडवाइजरी सेक्टर की वर्तमान स्थिति को समझना जरूरी है। आंकड़ों के अनुसार, भारत की लगभग 150 करोड़ आबादी को विभिन्न स्तरों पर फाइनेंशियल गाइडेंस की आवश्यकता है। लेकिन इसके विपरीत, रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर्स की संख्या केवल 2000-3000 के बीच है।
यह विशाल अंतर एक गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि इससे सामान्य निवेशकों को अक्सर भ्रामक जानकारी का सामना करना पड़ता है। अनरेगुलेटेड सलाह का प्रसार रिटेल निवेशकों के लिए जोखिम पैदा करता है।
मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतर को भरने के लिए अधिक रजिस्टर्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत है, और मार्केट मास्ट्रू जैसी कंपनियां इस दिशा में सकारात्मक कदम उठा रही हैं।
कंपनी के अधिकारियों के आधिकारिक बयान
इस उपलब्धि को लेकर कंपनी की लीडरशिप ने अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की हैं। डायरेक्टर अंकित यादव ने बताया, "सेबी की मंजूरी हमारे लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हमारा मानना है कि हमने देश में फाइनेंशियल एडवाइजरी के क्षेत्र में एक नई शुरुआत की है। आने वाले समय में हम अपनी टीम में योग्य रिसर्च एनालिस्ट्स को शामिल करेंगे ताकि अधिक से अधिक निवेशकों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन मिल सके।"
उन्होंने आगे कहा, "आज भी लाखों लोग गलत जानकारी और अनुचित सलाह के शिकार हैं। हमारा उद्देश्य इस सिस्टमिक समस्या को हल करना है।"
सह-डायरेक्टर कृतिका यादव, सीएफपी ने अपनी बात रखते हुए कहा, "हमें यह देखकर बेहद खुशी हो रही है कि हम डिजिटल फाइनेंशियल एजुकेशन बैकग्राउंड से आकर औपचारिक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को अपनाने वाले पहले प्रोफेशनल्स में से हैं। यह दृष्टिकोण अन्य फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर्स को भी प्रेरित कर सकता है कि वे उचित अनुपालन के साथ अपनी सेवाएं प्रदान करें।"
वैल्यू इन्वेस्टिंग दर्शन और मार्केट दृष्टिकोण
कंपनी का मूल दर्शन वैल्यू इन्वेस्टिंग पर आधारित है। यह दृष्टिकोण मौलिक रूप से मजबूत कंपनियों की पहचान करने पर केंद्रित है जो मार्केट में कम मूल्यांकित हों। वॉरेन बफेट और बेंजामिन ग्राहम जैसे दिग्गज निवेशकों के सिद्धांतों का पालन करते हुए, यह रणनीति दीर्घकालिक धन सृजन पर जोर देती है।
मार्केट मास्ट्रू की रिसर्च मेथडोलॉजी कंपनियों के आंतरिक मूल्य की गणना करने और उनकी तुलना वर्तमान मार्केट मूल्य से करने पर आधारित है। यह व्यवस्थित दृष्टिकोण रिटेल निवेशकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकता है क्योंकि वे अक्सर मार्केट की अस्थिरता से भ्रमित रहते हैं।
उद्योग पर व्यापक प्रभाव
यह विकास सिर्फ मार्केट मास्ट्रू के लिए नहीं, बल्कि पूरे फिनटेक इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि डिजिटल युग के फाइनेंशियल एजुकेटर्स कैसे पारंपरिक रेगुलेटरी स्ट्रक्चर्स को अपना सकते हैं।
सेबी का यह निर्णय यह भी संकेत देता है कि रेगुलेटर नए प्रारूपों के फाइनेंशियल सर्विस प्रोवाइडर्स को मान्यता देने के लिए तैयार है, बशर्ते वे उचित अनुपालन बनाए रखें।
फाइनेंशियल सेक्टर के विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रेंड आने वाले समय में अन्य कंपनियों को भी समान रास्ता अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।
लॉन्च टाइमलाइन और सर्विस ऑफरिंग्स
मार्केट मास्ट्रू ने अपनी व्यापक रिसर्च सेवाओं को दीवाली 2025 तक लॉन्च करने की योजना बनाई है। यह समय रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारी सीजन के दौरान निवेश गतिविधियां आम तौर पर बढ़ जाती हैं।
कंपनी का डिजिटल प्लेटफॉर्म भी जल्द ही लाइव होने वाला है, जिसके माध्यम से वे अपनी रिसर्च रिपोर्ट्स और निवेश सिफारिशें प्रदान करेंगे।
भविष्य के विस्तार की महत्वाकांक्षी योजनाएं
कंपनी के पास 2027 तक के लिए स्पष्ट रोडमैप है। उनका उद्देश्य भारत की सबसे बड़ी रिसर्च एनालिस्ट फर्म बनना है। इसके लिए वे देशव्यापी विस्तार करने और योग्य प्रोफेशनल्स को भर्ती करने की रणनीति बना रहे हैं।
यह विस्तार योजना यथार्थवादी भी लगती है क्योंकि देश में योग्य रिसर्च एनालिस्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर जब कैपिटल मार्केट्स में रिटेल भागीदारी बढ़ रही है।
रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का विकसित स्वरूप
सेबी का यह अप्रूवल व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। फाइनेंशियल सर्विसेज रेगुलेटर लगातार अपने दिशानिर्देशों को विकसित कर रहा है ताकि आधुनिक बिजनेस मॉडल्स को समायोजित किया जा सके।
यह विकास डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेज और पारंपरिक रेगुलेटरी अनुपालन के सफल एकीकरण का उदाहरण है, जो भविष्य में समान व्यवसायों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
मार्केट मास्ट्रू की सफलता की कहानी फाइनेंशियल सेक्टर में नवाचार और अनुपालन के साथ टिकाऊ बिजनेस मॉडल्स बनाने की संभावना को उजागर करती है।