‘पुणे को नगरसेवक नहीं, प्रोजेक्ट मैनेजर चाहिए’: PMC चुनाव में इंजीनियर दंपती पठारे

इंजीनियर दंपती ऐश्वर्या-सुरेंद्र पठारे (BJP) पूर्वी पुणे PMC वार्ड 3-4 से प्रोजेक्ट मैनेजर मॉडल पर चुनाव लड़ रहे हैं। पारंपरिक नगरसेवकों के बजाय डेटा-आधारित विकास, समयबद्ध निष्पादन का वादा।

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Sartaj Singh
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इंजीनियर दंपती ऐश्वर्या-सुरेंद्र पठारे पूर्वी पुणे PMC चुनाव प्रचार के दौरान डेटा-आधारित विकास योजनाएँ प्रस्तुत करते हुए

पुणे को प्रोजेक्ट मैनेजर चाहिए: ऐश्वर्या-सुरेंद्र पठारे इंजीनियर दंपती PMC चुनाव में पेशेवर शहरी प्रशासन का वादा।

पुणे महानगरपालिका (PMC) के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, पूर्वी पुणे में चुनावी बहस पारंपरिक राजनीति से आगे बढ़कर पेशेवर शहरी प्रशासन की ओर मुड़ती दिखाई दे रही है। वार्ड क्रमांक 3 और 4 से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अधिकृत उम्मीदवार, इंजीनियर दंपती ऐश्वर्या पठारे और सुरेंद्र पठारे, नगर प्रशासन को “प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मॉडल” पर चलाने की वकालत कर रहे हैं।

दोनों उम्मीदवारों का कहना है कि तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र में मतदाताओं की अपेक्षाएँ बदल चुकी हैं। अब केवल प्रतिनिधित्व या व्यक्तिगत पहुँच पर्याप्त नहीं है, बल्कि योजनाबद्ध विकास, समयबद्ध निष्पादन और स्पष्ट जवाबदेही की मांग बढ़ रही है। इसी सोच के साथ उनका चुनावी अभियान योजना, टाइमलाइन और परिणामों पर केंद्रित है।

ऐश्वर्या पठारे ने कहा, “आज पुणे के नागरिक पारंपरिक नगरसेवक नहीं, बल्कि ऐसे प्रोजेक्ट मैनेजर की तलाश में हैं जो विकास कार्यों की योजना बना सके, उन्हें लागू करे और समय पर पूरा कराए। लोगों को अब वादों से ज्यादा डिलीवरी चाहिए।”

सुरेंद्र पठारे ने बताया कि पुणे, विशेष रूप से पूर्वी पुणे, बुनियादी ढांचे के दबाव, यातायात अव्यवस्था, जलापूर्ति और कचरा प्रबंधन जैसी जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है। “इन समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी समझ और व्यावहारिक दृष्टिकोण जरूरी है। शहरों को अब भावनात्मक राजनीति नहीं, बल्कि पेशेवर नेतृत्व की आवश्यकता है,” उन्होंने कहा।

दंपती का चुनावी अभियान अपनी डेटा-आधारित कार्यशैली के कारण भी चर्चा में है। पारंपरिक नारों और भीड़-आधारित भाषणों की जगह वार्ड-स्तरीय अध्ययन, प्राथमिकताओं की पहचान और संरचित प्रस्तुतियाँ उनके प्रचार का अहम हिस्सा हैं। स्थानीय समस्याओं को आंकड़ों और कार्ययोजनाओं के साथ रखने की यह शैली शहरी मतदाताओं के बीच अलग पहचान बना रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पठारे दंपती की उम्मीदवारी शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में एक उभरती प्रवृत्ति को दर्शाती है, जहाँ इंजीनियरों, प्रबंधन विशेषज्ञों और अन्य पेशेवरों की भागीदारी बढ़ रही है। ऐसे उम्मीदवार नगर निकायों में पारदर्शिता, दक्षता और कॉरपोरेट-शैली के प्रबंधन को लागू करने की बात कर रहे हैं, खासकर उन संस्थाओं में जो बड़े पैमाने पर सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और सेवाओं की जिम्मेदारी निभाती हैं।

पुणे महानगरपालिका चुनाव को इस दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है कि क्या मतदाता पारंपरिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बजाय पेशेवर और निष्पादन-केंद्रित प्रशासन मॉडल को स्वीकार करते हैं।

गौरतलब है कि पुणे में PMC चुनाव के लिए मतदान 15 जनवरी 2026 को होगा, जबकि मतगणना 16 जनवरी 2026 को की जाएगी।

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